Home राज्यRTO: प्रवर्तन के अफसर ‘अपनों’ से कर रहे सियासत, लोग सड़कों पर मर रहे, CM योगी के आदेश को भी ठेंगे पर रखा

RTO: प्रवर्तन के अफसर ‘अपनों’ से कर रहे सियासत, लोग सड़कों पर मर रहे, CM योगी के आदेश को भी ठेंगे पर रखा

by News Camp

Report By: Sachin Gupta

The News Camp, लखनऊ। राजधानी में साल 2025 की तुलना में इस साल 11.9 फीसदी दुर्घटनाएं बढ़ गईं हैं। इतना ही नहीं इन एक्सीडेंट में मरने वालों की संख्या में 10.6 फीसदी और घायलों की संख्या में 26.6 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। यह आंकड़े तब हैं जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार रोड एक्सीडेंट को कम करने के लिए प्लानिंग करने की बात कह चुके हैं। सड़क सुरक्षा शासन की प्राथमिकताओं में होने के बाद भी अफसरों की आपसी खींचतान का खामियाजा सड़क पर चलने वाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
परिवहन विभाग ने साल 2025 और 2026 के जनवरी से अगस्त तक का तुलनात्मक विवरण जारी किया है। यह विवरण चिंता बढ़ाने वाले हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई बार अफसरों को रोड एक्सीडेंट रोकने के निर्देश दिए हैं, लेकिन अफसरों की तैनाती में असामनता ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालांकि आंकड़ों के मुताबिक लखनऊ के अलावा कई दूसरे जिलों में रोड एक्सीडेंट की घटनाएं कम हुईं हैं। प्रदेश में साल 2025 की तुलना में इस साल 0.2 फीसदी ही एक्सीडेंट बढ़े हैं। वहीं वहीं मरने वालों की संख्या में मामूली गिरावट 0.1 फीसदी है। हालांकि घायलों की संख्या में 5.3 फीसदी केस बढ़े हैं।

लखनऊ के आंकड़े चिंताजनक
आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में लखनऊ में रोड एक्सीडेंट के मामले 1130 दर्ज हुए हैं। जबकि, मृतकों की संख्या 432 और घायलों की संख्या 801 दर्ज हुई है। वहीं साल 2026 में एक्सीडेंट का आंकड़ा बढ़कर 1264, मृतकों की संख्या 478 और घायलों की संख्या 1011 दर्ज हुई है। यह हाल तब है, जब लखनऊ में पूरा अमला बैठता है।

यह है प्रदेश का हाल

  • कुल 75 में 42 जिलों में रोड एक्सीडेंट, 38 जिलों में मृतकों और 46 जिलों में घायलों की संख्या बढ़ी हुई है।
  • रोड एक्सीडेंट के मामले में सबसे ज्यादा अलीगढ़ में 35.2 फीसदी, कौशांबी में 26 फीसदी और चंदौली 25.9 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।
  • मौतों के मामलों में शाहजहांपुर में सबसे ज्यादा 26.2 फीसदी, औरैया में 25.8 फीसदी और अमरोहा में 23.6 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।
  • घायलों की संख्या के अनुसार सबसे ज्यादा संतकबीरनगर में 69.7 फीसदी, अलीगढ़ में 66.9 और कौशांबी में 62.5 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।

अफसरों की कमी, मुख्यालय कर रहा नजरअंदाज
परिवहन विभाग में प्रवर्तन दलों की नियुक्ति में असमानता ने मुश्किलें बढ़ाईं हैं। लखनऊ में 33 लाख से ज्यादा गाड़ियां हैं, वहां अब चेकिंग अभियान के लिए सिर्फ एक अफसर एआरटीओ प्रवर्तन आलोक कुमार यादव ही हैं। ट्रांसफर सीजन में तीन यात्री कर अधिकारी (पीटीओ) का ट्रांसफर कर दिया गया। अब यहां पर एक भी पीटीओ नहीं है। जबकि, पीटीओ के चारों और तीन आरटीओ के पद खाली हैं। आरटीओ प्रवर्तन प्रभात पांडेय ने अफसरों की कमी को देखते हुए मुख्यालय को पत्र भी लिख चुके हैं। इसके बाद भी प्रवर्तन की जिम्मेदारी देख रहे अफसरों पर इसका असर नहीं पड़ा है।

अफसरों की आपसी खींचतान में पीस रहे लोग
प्रवर्तन के अफसरों के बीच खींचतान भी मुश्किलों का सबब बन गई है। यही वजह है कि मोटर वीकल इंस्पेक्टरों (एमवीआई) को फिल्ड पर उतरने की अनुमति नहीं दी जा रही है। जबकि, लखनऊ में तीन एमवीआई हैं। सवाल यह भी उठने लगे हैं कि क्या डग्गामारों के सिंडिकेट के दबाव में इन अफसरों को फिल्ड से दूर रखा जा रहा है? 25 अक्टूबर 2024 को आरआई को एमवीआई बनाने का प्रमुख सचिव ने आदेश जारी किया था। नौ अप्रैल 2025 को कैबिनेट से भी अप्रूवल मिल चुका है। इसके बाद 24 अप्रैल 2025 को आरआई को एमवीआई पदनाम के साथ चेकिंग अधिकार की अधिसूचना जारी की गई। इसके बाद भी एमवीआई को फिल्ड पर नहीं उतारा जा रहा है। वर्तमान स्थिति यह है कि एमवीआई को आईडी जारी की चुकी है। हालांकि अभी तक टैबलेट नहीं मिला है। साथ ही गाड़ी की व्यवस्था नहीं है। विकल्प के रूप में टैबलेट की जगह पर सामान्य मोबाइल से भी आईडी एक्टिवेट की जा सकती है।

डग्गामारी पर भी रोक नहीं
राजधानी में डग्गामार इतने हावी हैं कि वो शहर के अंदर रेलवे और बस स्टेशनों से जाकर सवारियां उठा रहे हैं। पहले लखनऊ में डग्गामारों के प्रमुख अड्डे शहीद पथ, चिनहट, कमता, अवध चौराहा, अहिमामऊ, रेजिडेंसी कैसरबाग, मड़ियांव, तेलीबाग और पीजीआई ही थे। वर्तमान में पॉलिटेक्निक अब बड़ा हब बनता जा रहा है। इसके अलावा गौतमबुद्ध पार्क डालीगंज, इंजीनियरिंग कॉलेज पुल, फिनिक्स प्लासियो, पॉलिटेक्निक पुल, पारा ओवरब्रिज, चिनहट पुल के अलावा ट्रांसपोर्टनगर में आरटीओ ऑफिस के आसपास करीब दर्जन भर से ज्यादा अड्डे हैं। वहीं कैसरबाग, आलमबाग, गोमतीनगर समेत कई इलाकों ने डग्गामारों ने नये अड्डे बना लिए हैं।

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