Home राज्यनिजीकरण से रोडवेज में बड़ा भ्रष्टाचार, खत्म हो रहीं बसें, पढ़ें बड़ा खुलासा

निजीकरण से रोडवेज में बड़ा भ्रष्टाचार, खत्म हो रहीं बसें, पढ़ें बड़ा खुलासा

निजीकरण के फेर में हांफ रही यूपी रोडवेज़ बसें: लखनऊ (अवध डिपो) समेत 19 डिपो की पोल खुली मुख्यालय की समीक्षा बैठक में फूटा खामियों का बम: राजधानी में रोजाना 15 बसें ऑफ-रोड, ब्रेकडाउन और घटते माइलेज से यात्री हलकान

by News Camp

The News Camp, लखनऊ (19 August 2026): उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) की बसों के रख-रखाव (मेंटेनेंस) को निजी हाथों में सौंपने का प्रयोग यात्रियों की सुरक्षा और सरकारी खजाने पर भारी पड़ता दिख रहा है। परिवहन निगम मुख्यालय में मुख्य प्रधान प्रबन्धक (प्राविधिक) राहुल चौधरी की अध्यक्षता में हुई 19 डिपो की समीक्षा बैठक में आउटसोर्सिंग एजेंसियों की गंभीर कमियां और लापरवाही उजागर हुई हैं।

लखनऊ (अवध डिपो) की स्थिति बेहद चिंताजनक है। अवध डिपो की कार्यप्रणाली पर समीक्षा बैठक में गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक रोजाना 15 बसें ऑफ-रोड हैं यानी अवध डिपो में औसतन 15 बसें रोजाना खराब (ऑफ-रोड) खड़ी रहती हैं, जिससे रूटों पर बसों का संकट खड़ा हो रहा है। डिपो में दैनिक चेकिंग में बरती जा रही लापरवाही के कारण बीच रास्ते में बसों के खराब (ब्रेकडाउन) होने की घटनाएं बढ़ गई हैं। इतना ही नहीं अवध डिपो की बसों के डीजल औसत (माइलेज) में लगातार गिरावट आ रही है।

कमियां: डिपो के रजिस्टर में दर्ज कमियों व डिफेक्ट्स का समयबद्ध निस्तारण नहीं किया जा रहा है। लखनऊ में अवध डिपो का कार्य संभालने वाली फर्म मैसर्स एसडीएल स्क्रैपवेंजर जेवी है।

प्रदेश भर के अन्य डिपो में सामने आईं मुख्य खामियां

– प्रयागराज (जीरो रोड डिपो): परिचालकों (Conductors) द्वारा रूट पर अपना पैसा लगाया जा रहा है, जिसका भुगतान फर्म नहीं कर रही है। 10 बसों में बैटरियां तक नहीं हैं और ईपीएफ (EPF) जमा नहीं हो रहा है।

– कानपुर (विकासनगर डिपो): आउटसोर्स कर्मचारियों का ईपीएफ जमा नहीं कराया जा रहा और नए कर्मियों का रिकॉर्ड तक उपलब्ध नहीं कराया गया।

– सहारनपुर (छुटमलपुर डिपो): अनुबंध के अनुसार 59 की जगह केवल 45 कर्मचारी तैनात हैं। फिल्टर व ब्रेक लाइन जैसे सामान के असली बिल नहीं दिए जा रहे, रिट्रीडिंग टायर का रिकॉर्ड गायब है।

– अलीगढ़ (एटा), झांसी व कैंट (वाराणसी): तैनात कर्मचारियों को तकनीकी जानकारी ही नहीं है, जिससे बसों की स्थिति मैकेनिकल रूप से जर्जर हो रही है।

उद्घाटन से पहले ही सीएम योजना की बस ठप:

– गोरखपुर (देवरिया डिपो): ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण योजना’ की बस खराब टायरों की वजह से उद्घाटन से पहले ही खड़ी हो गई और उसकी पेंटिंग भी घटिया पाई गई।

2 लाख किमी मेंटेनेंस पूरी तरह ठप:

– हरदोई, एटा, जीरो रोड, झांसी और कैंट डिपो में नियमानुसार होने वाला 2 लाख किलोमीटर का मेंटेनेंस फर्म द्वारा नहीं कराया जा रहा है, जिससे बसें समय से पहले खटारा हो रही हैं।

बसों की छत से टपक रहा पानी व टूल का अभाव:

– चित्रकूट (बांदा डिपो): बसों की छतों से पानी टपकने की गंभीर समस्या दर्ज की गई।

– अयोध्या (सुल्तानपुर) व देवीपाटन (बलरामपुर): BS-6 तकनीक वाली आधुनिक बसों को ठीक करने के लिए आवश्यक डायग्नोस्टिक टूल ही उपलब्ध नहीं हैं।

– झांसी: मै० आरके०ऑटोमोबाइल्स काम रही। लोकल बैटरी का इस्तेमाल, स्पेयर पार्ट्स की किल्लत, 2 लाख मेंटेनेंस ठप।

मुख्यालय का अल्टीमेटम: सुधरें या अनुबंध रद्द होगा

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधान प्रबन्धक (प्राविधिक) बीके चौधरी ने सभी 19 सेवा प्रदाताओं को कड़े निर्देश जारी किए हैं। कहा है शर्त के अनुसार योग्य डिप्लोमा होल्डर फोरमैन/सुपरवाइजर व कुशल मैकेनिक तैनात किए जाएं। स्पेयर पार्ट्स केवल ऑथराइज्ड OE कंपनियों से ही खरीदें और पार्ट्स पर QR कोड अनिवार्य हो। कर्मचारियों का ईपीएफ (EPF) समय पर जमा कर उसकी रसीद सेवा प्रबन्धक को दी जाए। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर इन कमियों को दूर नहीं किया गया, तो अगले माह अनुबंध की शर्तों के अनुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई व ठेका निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।

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