The News Camp लखनऊ, 27 August 2026: रक्षाबंधन के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में एक अनूठा और भावनात्मक दृश्य देखने को मिला। जल जीवन मिशन के माध्यम से गांवों में हर घर तक नल से जल पहुंचने से खुश महिलाओं ने उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) और जल जीवन मिशन के अधिकारियों को राखी बांधकर अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। महिलाओं का कहना है कि घर-घर नल से पानी पहुंचने के कारण उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पहले की तुलना में काफी आसान और सुविधामुक्त हो गई है।
अफसरों की कलाई पर बांधी राखी, जताया आभार
विभिन्न जिलों में आयोजित विशेष कार्यक्रमों के दौरान महिलाओं ने जल निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को राखी बांधकर पेयजल आपूर्ति के लिए धन्यवाद दिया:
- लखनऊ: मोहनलालगंज ब्लॉक के भावाखेड़ा पेयजल योजना क्षेत्र में राजकुमार की पत्नी ममता ने जल निगम ग्रामीण के कनिष्ठ अभियंता (जेई) मनोज कुमार को राखी बांधी।
- देवरिया: महराजपुर पेयजल योजना क्षेत्र में शिखा चौहान ने जल निगम के अधिकारी राजेश यादव को राखी बांधकर जल आपूर्ति शुरू कराने के लिए आभार जताया।
- वाराणसी: खेवासीपुर ग्राम पंचायत में मीना देवी ने सहायक अभियंता अमित सिंह को रक्षासूत्र बांधा।
- अयोध्या: अयोध्या के ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाओं ने जल निगम के अधिकारियों को रक्षासूत्र बांधकर धन्यवाद ज्ञापित किया।
पानी लाने में लगने वाला समय और श्रम बचा
ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि पहले उन्हें रोजाना पानी लेने के लिए घर से काफी दूर पैदल जाना पड़ता था। सुबह का एक बड़ा हिस्सा पानी ढोने में ही बीत जाता था, चाहे भीषण गर्मी हो या ठंड।
अब हर घर नल से जल योजना के क्रियान्वयन के बाद पानी सीधे उनके घर तक पहुंच रहा है। इससे उनके समय और शारीरिक श्रम दोनों की भारी बचत हो रही है। इस बचे हुए समय का उपयोग महिलाएं अपने बच्चों की देखभाल, परिवार, खेती-बाड़ी, पशुपालन और अन्य आजीविका संबंधी कार्यों में कर पा रही हैं।
विकास और विश्वास का नया बंधन
महिलाओं ने कहा कि जैसे भाई अपनी बहन की सुरक्षा और खुशियों का संकल्प लेता है, उसी प्रकार गांवों में स्वच्छ पेयजल की निर्बाध आपूर्ति ने उनके जीवन में सम्मान और सहूलियत का एक नया अध्याय जोड़ा है।
जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में पेयजल व्यवस्था सुदृढ़ होने का सबसे सकारात्मक असर महिलाओं के जीवन स्तर पर पड़ा है, क्योंकि पारंपरिक रूप से पानी जुटाने की जिम्मेदारी उन्हीं पर रहती थी। रक्षाबंधन पर बांधी गई ये राखियां सरकारी व्यवस्था और ग्रामीण परिवारों के बीच मजबूत होते भरोसे और सहभागिता का प्रतीक बन गई हैं।