The News Camp लखनऊ: भारतीय रेलवे के अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (RDSO) समेत उत्तर रेलवे (NR) और पूर्वोत्तर रेलवे (NER) के लखनऊ मंडल में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की ताबड़तोड़ कार्रवाइयों के बाद भी भ्रष्टाचार का खेल थम नहीं रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई की रडार पर इस समय रेलवे के कई बड़े प्रोजेक्ट्स और उनसे जुड़े वरिष्ठ अधिकारी हैं। एनआर और एनईआर के बाद अब आरडीएसओ के अफसरों पर हुई कड़ी कार्रवाई से रेल प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।
स्थानीय ठेकेदारों को नजरअंदाज करने और रिश्वतखोरी का आरोप
रेलवे में चल रही इस बड़ी जांच के पीछे स्थानीय ठेकेदारों की लगातार आ रही शिकायतें हैं। ठेकेदारों का आरोप है कि उत्तर प्रदेश के स्थानीय और छोटे ठेकेदारों को दरकिनार कर बाहरी राज्यों की पसंदीदा कंपनियों को बड़े प्रोजेक्ट बांटे जा रहे हैं। इतना ही नहीं, निचले स्तर पर मेंटेनेंस, मरम्मत और छोटे निर्माण कार्यों के बिल पास कराने के एवज में भी अफसरों द्वारा भारी-भरकम रिश्वत वसूली जा रही है।
कैश के साथ ‘अनैतिक मांगों’ का दबाव
चारबाग में काम कर चुके एक ठेकेदार ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि अब बात सिर्फ पैसों के लेन-देन तक सीमित नहीं रह गई है। कुछ अफसर काम देने और बिल पास कराने के बदले अय्याशी की अजीबो-गरीब मांगें करने लगे हैं। हाल ही में गिरफ्तार हुए एक बड़े अफसर का केस भी ऐसे ही ठेकेदार की शिकायत पर आधारित था, जो अधिकारी की इन अनैतिक और अजीब मांगों से परेशान हो चुका था।
CBI की हालिया बड़ी कार्रवाइयां:
RDSO अफसर 4 लाख की घूस में गिरफ्तार: सीबीआई ने आरडीएसओ लखनऊ के एक डिप्टी डायरेक्टर और सीनियर सेक्शन इंजीनियर को कोलकाता की कंपनी से 4 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए हावड़ा (पश्चिम बंगाल) से रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह घूस फैक्ट्री प्लांट व मशीनरी निरीक्षण की अनुकूल रिपोर्ट बनाने के लिए मांगी गई थी।
गति शक्ति यूनिट में बड़ी गिरफ्तारी: जुलाई 2025 में सीबीआई ने उत्तर रेलवे लखनऊ की गति शक्ति यूनिट के डिप्टी चीफ इंजीनियर, सीनियर सेक्शन इंजीनियर (ड्राइंग) और ऑफिस सुपरिंटेंडेंट समेत 5 लोगों को दबोचा था। भदोही-वाराणसी प्रोजेक्ट में टेंडर और काम पास कराने के नाम पर रिश्वत ली गई थी।
परिवार की फर्मों को बांटे ठेके:
जांच में सामने आया कि गति शक्ति यूनिट से पकड़ी गईं एक अफसर ने अपने करीबियों और परिवार के नाम पर 3 फर्में बना रखी थीं। वह खुद ही इन फर्मों को ठेके दिलवाने से लेकर भुगतान कराने तक का पूरा काम मैनेज करती थी।
पेंशन क्लेम पर भी घूसखोरी:
लखनऊ में ही एक कर्मचारी का पेंशन दावा प्रोसेस करने के एवज में रिश्वत लेते हुए रेलवे कर्मी को दबोचा जा चुका है। सीबीआई की लगातार कार्रवाइयों के बावजूद अफसरों में खौफ न दिखना और रेलवे में भ्रष्टाचार की शिकायतें बढ़ना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।