The News Camp, लखनऊ (17 August)। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस (DL) बनाने वाले प्राइवेट कर्मचारियों की भर्ती के नाम पर एक बड़े बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ है। विभाग के अफसरों और एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने मिलकर 280 से अधिक कर्मचारियों से नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 14.50 करोड़ रुपये की मोटी रकम वसूल ली। जरूरत महज 225 कर्मचारियों की थी, लेकिन अवैध कमाई के चक्कर में मिलीभगत कर 320 लोगों को रख लिया गया। अब मामला तूल पकड़ते ही 45 कर्मचारियों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है।
घोटाले की पूरी इनसाइड स्टोरी•
बरेली में FIR से खुली पोल: बरेली आरटीओ में डीएल कर्मी के रूप में भर्ती हुए अमन अग्रवाल की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। अमन से नौकरी के एवज में 5 लाख रुपये वसूले गए थे।
• बड़े अफसरों पर गिरी गाज: एफआईआर में पूर्व अपर परिवहन आयुक्त (IT) सुनीता वर्मा समेत ‘सिल्वर टच’ एजेंसी के श्याम मोहन अग्निहोत्री, निखिल वर्मा, विकास यादव, शैलेंद्र, हारुन अंसारी और विमल पाठक को नामजद किया गया है।
• एजेंसियों का नेटवर्क: प्रदेशभर में डीएल प्रिंटिंग और डिलीवरी का जिम्मा तीन एजेंसियों—सिल्वर टच, फोकाम और रोजमार्टा के पास है। नियम के मुताबिक प्रत्येक एजेंसी को 75-75 कर्मी रखने थे, लेकिन वसूली के लिए 125 से ज्यादा भर्ती कर दिए गए।
• सैलरी ही मांग ली एडवांस: जब कर्मचारियों से उनकी ही तनख्वाह का पैसा एडवांस में वापस मांगा जाने लगा, तब कर्मियों का गुस्सा फूटा और मामला थाने तक पहुंच गया।
पैसा ऐंठा और फिर दिखा दिया बाहर का रास्ता
जांच में सामने आया है कि जिन कर्मचारियों ने सैलरी का पैसा वापस लौटाने से इनकार किया, उन्हें जबरन नौकरी से निकाल दिया गया। ऐसे 45 कर्मी अब तक हटाए जा चुके हैं। सूत्रों की मानें तो वसूली का यह नेटवर्क कोडवर्ड में चलता था और पूर्व एटीसी (IT) अपने पद का फायदा उठाकर पहले भी ऐसी शिकायतों को दबाती रही हैं।
आगे क्या होगा?
बरेली पुलिस अब परिवहन विभाग के मुख्यालय में पूछताछ की तैयारी कर रही है। आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इस घोटाले को लेकर नई एफआईआर दर्ज हो सकती हैं।