The News Camp लखनऊ:
बहुजन समाज पार्टी (BSP) 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर एक्शन मोड में आ गई है। पार्टी अपने संस्थापक मान्यवर कांशीराम की पुण्यतिथि (9 अक्टूबर) को एक विशाल राजनीतिक आयोजन और शक्ति प्रदर्शन में बदलने की तैयारी कर रही है। लखनऊ स्थित बीएसपी प्रदेश कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक में सुप्रीमो मायावती ने साफ निर्देश दिए हैं कि इस बार प्रदेश के सभी 18 मंडलों के कार्यकर्ता राजधानी पहुंचेंगे।आम तौर पर पश्चिमी यूपी के कार्यकर्ता नोएडा स्थित दलित प्रेरणा स्थल पर जुटते हैं, लेकिन इस बार पूरे राज्य के कैडर को लखनऊ के कांशीराम स्मारक पर एकत्र किया जा रहा है। पिछले साल इस आयोजन में करीब 5 लाख से अधिक लोग जुटे थे, जबकि इस बार यह आंकड़ा और बड़ा होने की उम्मीद है। राजनीतिक जानकार इसे 2027 चुनाव के लिए मायावती का औपचारिक प्रचार आगाज मान रहे हैं।
BSP की रणनीति के 4 बड़े टेकअवे:
मिशनरी तेवर और कैडर में ऊर्जा: मायावती ने पदाधिकारियों को ‘साम-दाम-दंड-भेद’ की राजनीति का मुकाबला करते हुए राज्य में पांचवीं बार बीएसपी सरकार बनाने का लक्ष्य दिया है।
सितंबर अंत तक 200 विधानसभा प्रभारी तय: पार्टी अब तक करीब 50 सीटों पर प्रभारी (संभावित उम्मीदवार) घोषित कर चुकी है। इस महीने के अंत तक 200 विधानसभाओं में प्रभारियों के नाम फाइनल कर दिए जाएंगे।
मुद्दों की धार—महंगाई और बेरोजगारी: बीएसपी प्रमुख ने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए हैं कि वे महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी और पिछड़ेपन जैसे कोर मुद्दों को लेकर सीधे जनता के बीच जाएं।
युवाओं और ‘Gen-Z’ पर फोकस: मायावती ने मौजूदा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘जेन-जी और जेन-अल्फा’ जनविरोधी नीतियों के कारण आंदोलन करने को मजबूर हैं और सड़क पर उतरने पर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है।
चुनावी वादों और योजनाओं को बताया ‘ऊंट के मुंह में जीरा’
समीक्षा बैठक के दौरान मायावती ने सत्तारूढ़ दल के लोकलुभावन वादों और चुनाव बाद होने वाली वादाखिलाफी पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले महिलाओं को व्यक्तिगत लाभ देने की सरकारी घोषणाएं चुनाव को गलत तरीके से प्रभावित करने का प्रयास हैं। महंगाई और बेरोजगारी के बड़े संकट के आगे ऐसी सरकारी घोषणाएं महज ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ साबित हो रही हैं।कांशीराम की विरासत, मजबूत बूथ-स्तरीय संगठन और जनहित के मुद्दों के सहारे बीएसपी ने लखनऊ से 2027 के सत्ता संग्राम की बिसात बिछाना शुरू कर दिया है।