Home Healthगरीब मरीजों को महंगा विदेशी इंप्लांट नहीं देगा KGMU, आदेश जारी होते ही मचा बवाल, सोशल मीडिया पर शुरू हुई जंग

गरीब मरीजों को महंगा विदेशी इंप्लांट नहीं देगा KGMU, आदेश जारी होते ही मचा बवाल, सोशल मीडिया पर शुरू हुई जंग

by News Camp

The News Camp, लखनऊ: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) प्रशासन के एक नए आदेश ने राजधानी समेत पूरे प्रदेश के चिकित्सा गलियारों में हलचल मचा दी है। केजीएमयू के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) कार्यालय द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र के अनुसार, अब अस्पताल में भर्ती गरीब, विपन्न और आयुष्मान भारत योजना (PMJAY) के तहत इलाज कराने वाले मरीजों को हॉस्पिटल्स रिवॉल्विंग फंड (HRF) से किसी भी दशा में इंपोर्टेड या अत्यधिक महंगा विदेशी इंप्लांट इश्यू नहीं किया जाएगा।

आदेश पत्र (पत्रांक 352/सी०एम०एस०-कैम्प/26, दिनांक 10/09/2026) में साफ कहा गया है कि इन वर्गों के मरीजों के लिए केवल ‘मेड इन इंडिया’ (Made in India) यानी अच्छा और सस्ता भारतीय इंप्लांट ही जारी किया जाए। जैसे ही यह पत्र सोशल मीडिया और वॉट्सऐप ग्रुपों पर वायरल हुआ, वैसे ही डॉक्टर, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच तीखी बहस और जंग छिड़ गई है।

विशेष परिस्थिति में ही मिलेगा विदेशी इंप्लांट, अनुमति अनिवार्य

जारी आदेश के मुताबिक, यदि किसी विशेष या गंभीर परिस्थिति में किसी फैकल्टी/सर्जन को मरीज की जान बचाने के लिए इंपोर्टेड इंप्लांट लगाना बेहद जरूरी लगता है, तो इसके लिए CMS, MS या DMS से लिखित में अलग से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना लिखित अनुमति के यदि विदेशी इंप्लांट जारी किया गया, तो उसे सीधे तौर पर ‘वित्तीय अनियमितता’ (Financial Irregularity) माना जाएगा।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस: ‘मेक इन इंडिया’ बनाम ‘इलाज में भेदभाव’

इस आदेश के सामने आते ही सोशल मीडिया पर दो धड़े बन गए हैं:

  • समर्थन में तर्क: एक पक्ष का कहना है कि यह फैसला भारतीय मेडिकल इंडस्ट्री (‘मेक इन इंडिया’) और सरकारी बजट के सही इस्तेमाल के लिए बेहद जरूरी है। इससे कम बजट में अधिक से अधिक गरीब मरीजों का इलाज हो सकेगा और बिचौलियों व महंगे विदेशी ब्रांड्स के सिंडिकेट पर लगाम लगेगी।
  • विरोध में सवाल: वहीं, विरोध करने वाले डॉक्टरों और एक्टिविस्ट्स का तर्क है कि इलाज में मरीज की बीमारी की गंभीरता देखी जानी चाहिए, उसका आर्थिक स्तर नहीं। आलोचकों का कहना है कि विशेष मामलों में मंजूरी लेने की लंबी कागजी प्रक्रिया (Red Tape) के चक्कर में मरीज की जान पर आ बन सकती है और गरीब व अमीर के इलाज की गुणवत्ता में फर्क खड़ा हो जाएगा।

मुख्य बिंदु:

  • किसे नहीं मिलेगा बेहद महंगा विदेशी इंप्लांट: गरीब, विपन्न और आयुष्मान योजना के मरीजों को।
  • क्या है विकल्प: अनिवार्य रूप से केवल मेक इन इंडिया (भारतीय) इंप्लांट ही दिया जाएगा।
  • अपवाद: विशेष स्थिति में CMS/MS/DMS से लिखित मंजूरी लेनी होगी, वरना होगी वित्तीय अनियमितता की कार्रवाई।

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