The News Camp, लखनऊ: प्रदेश की बिजली कंपनियों में दलित अभियंताओं और कर्मचारियों के कथित उत्पीड़न को लेकर पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन के खिलाफ आक्रोश गहराता जा रहा है। उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन ने प्रबंधन पर मनमानी और एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा है कि दलित अभियंताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। इस मामले में मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री, उपमुख्यमंत्री और एससी/एसटी आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है। वहीं, आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने भी अभियंताओं के समर्थन में उतरते हुए उग्र आंदोलन का ऐलान कर दिया है।
11 माह से निलंबित मुख्य अभियंता का मामला गरमाया
एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, मुख्य अभियंता हरिश्चंद्र वर्मा को बिना किसी गंभीर दोष के लगभग 11 महीने से निलंबित रखा गया है, जो दलित उत्पीड़न का प्रत्यक्ष उदाहरण है। संगठन ने बताया कि श्री वर्मा की पत्नी पिछले 7 वर्षों से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं और हफ्ते में तीन दिन उनका डायलिसिस होता है। दो दिन पहले स्थिति बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका ऑपरेशन हुआ है और हालत नाजुक बनी हुई है। ऐसी परिस्थितियों में 11 महीने से निलंबन के कारण उनका परिवार भारी मानसिक व आर्थिक दबाव में है।
उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आर.पी. कैन, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, उपाध्यक्ष पी.एम. प्रभाकर और संगठन सचिव मुकेश बाबू ने कहा कि वर्ष 1959 में राज्य विद्युत परिषद के गठन के बाद से दलित अभियंताओं के उत्पीड़न का यह सबसे गंभीर मामला है। उन्होंने निष्पक्ष जांच कराकर प्रताड़ना पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने दिया समर्थन, प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
इस मामले में सभी सरकारी विभागों के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली ‘आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति’ ने भी एंट्री ले ली है। समिति के संयोजक डॉ. राम शब्द जैसवारा और अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि दलित कार्मिकों के साथ उत्पीड़न या भेदभाव की शिकायतों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
समिति ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा सिर्फ बिजली विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी सरकारी विभागों में कार्यरत आरक्षण समर्थक कर्मचारियों के अधिकारों और सम्मान से जुड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मुख्य अभियंता हरिश्चंद्र वर्मा के निलंबन की समीक्षा कर जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो विभिन्न सरकारी विभागों के कार्मिक संगठनों को एकजुट कर प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
मुख्य बिंदु:
- प्रबंधन पर आरोप: पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर दलित अभियंताओं के उत्पीड़न और एकतरफा कार्रवाई के आरोप।
- मानवीय आधार पर राहत की मांग: 11 माह से निलंबित मुख्य अभियंता हरिश्चंद्र वर्मा की पत्नी की गंभीर बीमारी (डायलिसिस व ऑपरेशन) का हवाला देकर निलंबन वापसी की मांग।
- आयोग व सरकार से गुहार: मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री, उपमुख्यमंत्री व एससी/एसटी आयोग में शिकायत दर्ज।
- आंदोलन की चेतावनी: आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने समर्थन दिया; मांग पूरी न होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान।