Home राज्यDL का टेस्ट: घने बगीचे के बीच सुनसान सड़क, TC साहेब! दिव्यांग व महिलाएं उतनी दूर कैसे जाएंगे, कुछ हुआ तो लेंगे आप जिम्मेदारी?

DL का टेस्ट: घने बगीचे के बीच सुनसान सड़क, TC साहेब! दिव्यांग व महिलाएं उतनी दूर कैसे जाएंगे, कुछ हुआ तो लेंगे आप जिम्मेदारी?

by News Camp

Report By: Sachin Gupta

The News Camp, लखनऊ। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए टेस्ट देने के लिए प्रत्यायन चालन प्रशिक्षण केंद्र (एडीटीसी) पर जाने की मजबूरी को लेकर आवेदकों ने सवाल उठा दिये हैं। शहर से बाहर काकोरी क्षेत्र के मौंदा गांव में बने एडीटीसी पर पहुंचने में आवेदकों को पसीने छूट जा रहे हैं। क्योंकि, यहां तक जाने के लिए गांव के बीच घने बगीचों और सुनसान रास्तों से करीब 20 किमी की दूरी तय करना महिला सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। महिलाओं और दिव्यांगों के लिए पहुंचना किसी पहाड़ चढ़ने जैसा है। जबकि, आरटीओ कार्यालय में भी टेस्ट के लिए ट्रैक बना हुआ है, ऐसा ही ट्रैक एडीटीसी में भी है। एडीटीसी को बनाने के पीछे का मकसद प्रशिक्षण दिया जाना है।

इंदिरानगर की रहने वाली खुश्बू मंगलवार को एडीटीसी पर टेस्ट देने पहुंची थीं। उन्होंने कहा कि सरकार सुविधा देने की बात कह रही है, लेकिन यहां तो ड्राइविंग लाइसेंस का टेस्ट देना इतना मुश्किल कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि फॉर्म भरने के बाद पहले वो करीब 20 किमी दूर आरटीओ कार्यालय में जाकर स्क्रूटनिंग और फोटो कराई। वहां से फिर 18 किमी दूर डीएल के टेस्ट के लिए एडीटीसी जाना पड़ा। घर से एडीटीसी पहुंचने में दो घंटे लगे।

खुशबू ने बताया कि मैप की मदद से यहां तक पहुंच तो गईं, लेकिन जो मुश्किलें हुई हैं, उसको बयां नहीं कर सकते। रास्ते खराब हैं। घने बगीचों के बीच से होकर जाना है। कई गांव पड़ते हैं। यहां कोई कुछ बताने वाला तक नहीं है।

खतरा हुआ तो मदद भी नहीं मांग सकते

अभिभाक सुरेश थापा ने कहा कि यह मुख्य शहर से दूर है। गाड़ी खराब हुई या कोई अन्य दिक्क्त हुई तो किसी से मदद भी नहीं मांग सकते। ऐसे खराब रास्तों से आना-जाना ही मुश्किलों को बढ़ाने वाला है। दिव्यांग लोग कैसे आएंगे यहां तक, सरकार और जिम्मेदारों को इस पर सोचना चाहिए।

फेल हों तो कराएं प्रशिक्षण

आवेदक राम कुमार यादव ने कहा कि एडीटीसी को प्रशिक्षण के लिए बनाया गया है। नियम के अनुसार दो बार फेल होने वालों को यहां प्रशिक्षण के लिए भेजा जाए। आवेदकों ने कहा कि वो ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ ऑफिस स्क्रूटनिंग के लिए गए थे। वहां पर भी तो ऐसा ही ट्रैक है। एडीटीसी से बहुत अलग नहीं है। फिर यहां क्यों भेज रहे हैं।

घट गए डीएल, नहीं हो रहे आवेदन

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