The News Camp, Agency : मिर्जपुर वेब सीरीज का एक डायलॉग है ‘बहुत तकलीफ होती है, जब आप योग्य हों और लोग आपकी योग्यता न समझें…’ इस डायलॉग का चरितार्थ कर रही है नीति आयोग की एक ऐसी रिपोर्ट, जो चौंकाने वाली है। देश में स्नातक करने वाले 8.25% युवा ही अपनी योग्यता के अनुरूप काम कर रहे हैं। यानी करीब 91% ग्रेजुएट्स योग्यता मुताबिक काम नहीं पा रहे हैं। इतना ही नहीं 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के 8.70 करोड़ युवा ऐसे हैं, जो न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न रोजगार में हैं और न ही किसी तरह का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं यानी ‘खाली’ हैं। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
आयोग की ‘विकसित भारत 2047 के लिए कौशल विकास की नई कल्पना’ रिपोर्ट में कहा गया है कि यह अनुमान वर्ष 2021 में किए गए राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (78वें दौर) के आंकड़ों पर आधारित है।
आयोग ने देश के कार्यबल और शिक्षार्थियों को बेहतर प्रभाव के लिए पांच वर्गों में बांटा है। इनमें स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, औपचारिक एवं अनौपचारिक तथा शिक्षा, रोजगार और प्रशिक्षण नहीं लेने वाले युवाओं का वर्ग और महिलाएं शामिल हैं।
प्रमुख बाधाएं
सही कोर्स, सरकारी योजनाओं और अप्रेंटिसशिप की जानकारी न होने से वोकेशनल शिक्षा को कमतर माना जाता है।
12वीं में वोकेशनल सब्जेक्ट न के बराबर हैं।कोर्स की फीस के साथ ट्रेनिंग में होने वाली कमाई का नुकसान भी बड़ी बाधा है। अच्छे प्लेसमेंट वाले कोर्स महंगे हैं।
पढ़ाई में थ्योरी पर ज्यादा जोर है, जबकि उद्योग के मुताबिक व्यावहारिक प्रशिक्षण कम है। संचार, डिजिटल और इंटरव्यू जैसी जरूरी दक्षताओं पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं है।
मंत्रालयों और योजनाओं के बीच समन्वय कमजोर है। भर्ती में कौशल के बजाय डिग्री को ज्यादा महत्व मिलता है।
ऐसे दूर होगी बेरोजगारी
कक्षा 6 से 12 तक रोजगार और उद्यमिता से जुड़े कौशल सिखाए जाएं। कक्षा 9 से अलग-अलग स्किल ट्रैक शुरू हों।
ITI, पॉलिटेक्निक और कॉलेजों में उद्योगों की भागीदारी बढ़े। अप्रेंटिसशिप से जुड़ी डिग्री को बढ़ावा मिले।
ग्रीन एनर्जी, EV और डिजिटल जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों के लिए छोटे और काम के कोर्स शुरू हों। प्रशिक्षण को नौकरी मिलने से जोड़ा जाए।
केंद्र, राज्यों की अप्रेंटिसशिप योजनाओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाया जाए। MSME को अप्रेंटिस रखने के लिए प्रोत्साहन दिया जाए।
स्कूलों में पाथवे क्लिनिक, महिलाओं के लिए सखी बूथ और MyGuide, Skill Sure, Skill Scout जैसे डिजिटल टूल्स शुरू किए जाएं। स्किल फेस्ट करवाए जाएं।